लड़ाई खत्म हो गई ! नहीं रहे भारत के एकमात्र बंगाली राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

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अंत में, वे लड़ाई जारी नहीं रख सके। पूर्व और एकमात्र बंगाली राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दिल्ली के आर्मी अस्पताल में अंतिम सांस ली।मृत्यु के समय वे 84 वर्ष के थे। उनकी मृत्यु से भारतीय राजनीति में एक महान अध्याय के अंत हो गया।
उनके बेटे अभिजीत मुखर्जी ने सोमवार शाम 5.45 बजे अपने पिता की मौत की खबर ट्वीट की।
बीते 9 अगस्त को पूर्व राष्ट्रपति अपने घर के बाथरूम में गिर गए थे और उनका सिर घायल हो गया था।
अगली सुबह उन्हें जल्दबाजी में अस्पताल ले जाया गया क्योंकि उनका बायाँ हाथ सुन्न हो गया था।
वहां डॉक्टरों ने जल्दबाजी में उनका ऑपरेशन करने का फैसला किया। लेकिन ऑपरेशन से पहले कोरोना का परीक्षण किया गया, तो उनका रिपोर्ट सकारात्मक आ गया।
पूर्व राष्ट्रपति ने सर्जरी से पहले ट्वीट किया कि उनका कोरोना सकारात्मक आया है। यही उनका आखिरी ट्वीट था।
सर्जरी कर उनके सिर से खून के थक्के को निकाल दिया गया था। तब से उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। 13 अगस्त से, वे गहरी कोमा में चले गये। कभी-कभी वे कुछ समय के लिए उपचार का जवाब दिये, लेकिन कल से हालत बिगड़ती चली गई ।
मस्तिष्क से रक्तस्राव और साथ में कोरोना संक्रमण अंत में वे इतना धक्का का सामना नहीं कर सके।
अंततःस्वतंत्रता के बाद की अखिल भारतीय राजनीति में सबसे सफल बंगाली और देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अंतिम सांस ली।
50 से अधिक वर्षों से राजनीति में सक्रिय प्रणब मुखर्जी को 2019 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
1997 में, उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार मिला। उन्हें 2008 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

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