“मार्क्स लेनिन” की विचारधारा से, मेहनतकश वर्ग को मिले, आठ घंटे काम,परमानेन्ट नौकरी, एग्रीमेंट का अधिकार,

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न्यूज फ्रंटलाइनर वेब डेस्क:-
1मई 2019, (आज ग्राफाईट मज़दूर यूनियन के सभापति पंकज रॉय सरकार ने श्रमिकों को संबोधित करते हुए कहा):-
पूरे दुनियां में मेहनतकश वर्ग की गुलामी की बेड़ियां तोड़ने का काम मार्क्स लेनिन ने किया, 1917 की अक्टूबर क्रांति के बाद, पूरी दुनिया में, सोशल वेलफेयर, राज्यों की स्थापना का काम शुरू हो गया था।
हमारे देश में 1926 में पहला ट्रेड यूनियन एक्ट बना था, जब अंग्रेज़ थे उन्हौने ही ये अधिकार हमें दिया था कि आप यूनियन बना सकते हो और सामूहिक सौदे बाजी कर सकते हो, जिसको हम एग्रीमेंट करना कहते हैं, उसी समय आठ घंटे का काम, और परमानेन्ट रोजगार देना चालू हुआ था, उसके और कुछ कानून भी आजादी के पहले, आजादी के समय बने ।
आज हमारे देश में, जो भी मेहनतकश लोगों को मिला, जो परमानेन्ट नौकरी पर बचे है, एग्रीमेंट कर रहे है, आठ घंटे काम कर रहे है, यह सब मार्क्स लेनिन की विचारधारा की देन हैं । हमारे मेहनतकश लोगों को आज यह समझने की ज़रुरत है कि समाजवाद मेहनतकश वर्ग की आर्थिक और सामाजिक आजादी का संघर्ष है, जिसका सूत्र मार्क्स लेनिन ने दिया, हमें ये भी समझने की ज़रुरत है कि आज के नौजवानो के जो हालात बन गए है, उसके लिए ये पूंजीवादी राजसत्ता है, जिसको आज भाजपा आर एस एस चला रहे है । अभी और दुर्दशा होने वाली है ।
आजादी के आन्दोलन में क्रांतिकारी बड़ी संख्या में मारे गए, और कांग्रेस के समाजवाद में कम्युनिस्ट पार्टीयॉ, कन्फयूज हो गई, जिसका परिणाम निकला कि हमारे देश की राजसत्ता देश के पूंजीपतियो के हाथ में आ गई।
आज मेहनतकश वर्ग को पूंजीवादी ताकतो, कांग्रेस और भाजपा ने मिलकर फिर उसी पुरानी गुलामी में धकेल दिया है ।आज नौजवान मारा मारा फिर रहा है, काम का समय खत्म हो रहा है, स्टाफ में तो बिल्कुल खत्म हो गया, 10 से 12 रोजाना काम करना है, अभी 10 घंटे का कानून आ रहा है, परमानेन्ट नौकरी खत्म हो गई, गुलामी की ठेकेदारी प्रथा आ गई, अधिकतम संख्या एग्रीमेंट से बाहर हो गई है । बाकी आप वेतन वृद्धि करने की बात भी नहीं कर सकते है । 
फिर वही 1900 के समय की गुलामी में देश के नौजवान पहुंच गए हैं, इस सब को बदलना है, वापिस परमानेन्ट नौकरी, बाकी सब अधिकार सब के लिए लेना है तो फिर वही मार्क्स लेनिन की विचारधारा पर देश के मेहनतकश वर्ग को जाना पड़ेगा, तभी इस संघर्ष की शुरुआत हो सकती हैं, तभी कुछ बदलाव की उम्मीद बन सकती है, इसके अलावा और कोई विकल्प नहीं है ।
यह पक्का था कि ये पूँजीवादी ताकते, भाजपा आर एस एस, कांग्रेस मेहनतकश वर्ग के पैरो में बेड़ियां, हाथों में हथकड़ी डालेगी, जो उन्हौने पिछले 50 सालो में डाल दी, अभी नरेंद्र मोदी जी को बहुत जल्दी है, इसलिए वो सब श्रम कानून बदल रहे है । वापिस 1900 में पहुंचा रहे है, जिसका काम तेजी से चल रहा है ।
नौजवानो, इसलिए लेनिन की मूर्ति तोड़ी जा रही है, उन्हें आतंकवादी कहा जा रहा है, सही कह रहे है, पूंजीपतियो के दलाल मजदूरों के नेता को आतंकवादी, असामाजिक तत्व ही कहते है । ये भाजपा आर एस एस शुद्ध रूप से पूँजीपतियो के संगठन है जो उनके फायदे के लिए काम करते है । आज सब अधिकार खत्म कर दिया है, मजदूर कुछ नहीं कर सकता । गुलामी करने को मजबूर है, जिसको ये लोग नसीब किस्मत कहते हैं । सब कुछ बदल सकता है, इस दिमागी गुलामी से बाहर हो जाओ ।
नौजवानो, आप खुद निर्णय करे आपके आदर्श कौन हो सकते है, कौन होना चाहिए । आज अपने हक अधिकार की आवाज़ उठानी है तो इंकलाब तो लाना होगा ।

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