कालीघाट में जितेंद्र की भूमिका पर रिपोर्ट,

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न्यूज़ फ्रंटलाइनर वेब डेस्क,4अप्रैल 2019,
आसनसोलय मे बहस रुकने का नाम नही ले रहा है। तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी मुनमुन सेन को बांकुड़ा के बदले आसनसोल केंद्र का उम्मीदवार बनाये जाने से सवाल उठने लगे हैं। पहले से ही जितेंद्र तिवारी आपने आपको को आसनसोल लोकसभा केंद्र का उम्मीदवार घोषित कर चुके है,लेकिन जितेंद्र तिवारी को नही मानेंगे मंत्री मलय घटक। तापस बनर्जी भी अरूप विश्वास के समक्ष जितेंद्र तिवारी के उम्मीदवारी के संबंध में अपनी अनिच्छा जाहिर कर चुके हैं।
बीते लोकसभा चुनाव में श्रमिक नेत्री दोला सेन के पराजित होने से लेकर अब तक बहुत जांच पड़ताल की गई है, इसी कारण से इस लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारो के नाम का चयन प्रक्रिया मे ममता बनर्जी और कोई रिस्क नही लेना चाहती,इस बात को उन्होंने अरूप विश्वास को साफ तौर पर बताया है।
आसनसोल के तृणमूल युवा कांग्रेस के नेता भी नहीं चाहते हैं कि जितेंद्र तिवारी को उम्मीदवार बनाया जाए। तृणमूल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 5-6 माह पहले ही जितेंद्र की संपत्ति बृद्धि का सम्पूर्ण रिपोर्ट नब्बानो पहुंच गया था। जिसके संबंध में जितेंद्र तिवारी का वहा से बुलावा आया था।
पुलिस से भी इस संबंध में जानकारी मांगी गई थी,वह भी जितेंद्र के विरुद्ध ही था।
जितेन्द्र तिवारी के विरुद्ध इससे पहले भी पुलिस से जानकारी प्राप्त की गई थी,
आसनसोल, रानीगंज में हुए सम्प्रदायिक दंगा के समय हिंदी भाषा के लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से भड़काने का लिखित शिकायत भी नब्बानो मे पहुंचा है। अब चारों तरफ से घिर चुके हैं आसनसोल के बिहारी बाबू।
जानकारी हो कि आसनसोल लोकसभा केंद्र में 25% वोटर हिंदी भाषा के लोग हैं और वहाँ के तृणमूल कार्यकर्ता मे भी 75% हिंदी भाषा के लोग हैं।
अब देखना यह है कि उनके चहेते नेता “जितेंद्र भैया” को उनके ही पार्टी द्वारा घेरे जाने पर क्या प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

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